surendra kumar shukla bhramar5's blog
ओ माँ ओ माँ ...प्रेम सुधा रस प्राण-दायिनी जान हमारी “माई” है ओ माँ ओ माँ ………..
Submitted by surendra kumar ... on Fri, 05/11/2012 - 05:26
प्रेम सुधा रस प्राण-दायिनी जान हमारी “माई” है
ओ माँ ओ माँ ………..
शिव से आओ “सीख” सभी लें
Submitted by surendra kumar ... on Tue, 11/15/2011 - 05:42
मेरे प्यारे छोटे नन्हे मुन्ने दोस्तों आज बाल दिवस के मौके पर अपने दोस्त बाल “भ्रमर” की ढेर सारी शुभ कामनाएं ग्रहण कीजिये …………
तेरी राखी आई पाया चूम इसे मै गले लगाया
Submitted by surendra kumar ... on Sat, 08/13/2011 - 01:48
सच तो शिव है -शिव ही करता नाग सरीखा संग-संग रहता
Submitted by surendra kumar ... on Sat, 07/09/2011 - 08:23
सच एक हंस है
दर्द देख जब रो मै पड़ता
Submitted by surendra kumar ... on Tue, 06/21/2011 - 20:15
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बूढ़े जर्जर नतमस्तक हो
हमका बनाऊ की बिगाडू मोरी माई
Submitted by surendra kumar ... on Wed, 06/15/2011 - 05:03
तुहिन कहू बड़े भाग से पाये
आज सूरज बड़ी देर कुछ आंक निकला
Submitted by surendra kumar ... on Thu, 06/02/2011 - 00:27
आज सूरज बड़ी देर कुछ आंक निकला
दुःख ही दुःख का कारण है
Submitted by surendra kumar ... on Tue, 05/31/2011 - 07:45
दुःख ही दुःख का कारण है
दिल पर एक बोझ है
मन मष्तिष्क पर छाया कोहराम है
आँखों में धुंध है
पाँवो की बेड़ियाँ हैं
हाथों में हथकड़ी है
धीमा जहर है
विषधर एक -ज्वाला है !!
राख है – कहीं कब्रिस्तान है
तो कहीं चिता में जलती
जलाती- जिंदगियों को
काली सी छाया है !!
फिर भी दुनिया में
दुःख के पीछे भागे
न जाने क्यों ये
जग बौराया है !!
ममता की तू मूरति माता
Submitted by surendra kumar ... on Mon, 05/09/2011 - 10:32
हे अनाथ की नाथ -प्राण हे
भाग्य विधाता -जग कल्याणी
राम की प्यारी- धरती अपनी ना जाने क्यों अभिशप्तित है
Submitted by surendra kumar ... on Sat, 04/23/2011 - 02:49
